मुख्य प्रष्ठ  | संपर्क 

पूज्य महाराजश्री

 
 

आनन्द वृन्दावन आश्रम

आध्यात्मिक कार्यक्रम

जनकल्याण सेवा

फोटो एलबम

वार्षिक कार्यक्रम

प्रकाशन

आश्रम समाचार

बेवलिंक

आपका अभिप्राय

 

आनन्द वृन्दावन
स्वामीश्री  सच्चिदानन्द सरस्वतीजी महाराज

आनन्द वृन्दावन आश्रम
स्वामी श्री अखण्डानन्द मार्ग
मोती झील वृन्दावन (मथुरा)
पिनः 281121 (भारत)

 

Follow us on !
 

 

 
 
 

आश्रम समाचार :-

 
 

आनन्द वृन्दावन आश्रम

श्री कृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव
श्री कृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव
श्री कृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव
श्री कृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव
श्री कृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव
 
गुरुपूर्णिमा महोत्सव
गुरुपूर्णिमा महोत्सव
गुरुपूर्णिमा महोत्सव
गुरुपूर्णिमा महोत्सव आनन्द वृन्दावन में दिनांक- 9-7-2017 , दिन-रविवार को  महाराजश्री जी की पादुका पूजन के साथ प्रारम्भ हुआ।  महाराजश्रीजी के  भक्त-शिष्य समारोह में सम्मिलित हुए एवं इस अवसर पर हुए सत्सङ्ग का लाभ उठाया । 
जगदगुरु श्री रामानुजाचार्य जयन्ती 
जगदगुरु श्री रामानुजाचार्य जयन्ती 
जगदगुरु श्री रामानुजाचार्य जयन्ती 
 आज दिनांक 1 मई 2017 तदनुसार वैशाख कृष्ण षष्ठी को आनन्द वृन्दावन आश्रम में  जगदगुरु श्री रामानुजाचार्य जी की जन्म जयन्ती हर्षोल्लास से मनाई गई। जिसमें सम्प्रदाय के विद्वान् संतों ने सम्मिलित हो आचार्यचरणों में अपने भाव कुसुमांजलि अर्पित की। 
             इस अवसर पर आयोजित सत्सङ्ग संगोष्ठी की अध्यक्षता संप्रदायाचार्य श्री अनिरुद्धाचार्य जी ने की। उन्होंने बताया कि परम पूज्य स्वामी श्री अखण्डानन्द जी महाराज द्वारा सभी वैदिक आचार्यों की जयंती मनाना महाराजश्री की उदार भावना का परिचायक है। जहाँ आचार्य श्री शंकराचार्य जी ने अवतार लेकर आध्यात्मिक भूमिका का शोधन किया, वहाँ श्री रामानुजाचार्य ने भक्ति, प्रपत्ति, शरणागति का बीजारोपण किया। आचार्य श्री जिस जीव को स्वीकार करते हैं, उसका कल्याण निश्चित है। उनमें विशेष दिव्य गुण करुणा प्रधान है वे पतित से पतित जीवों को भगवान् के शरणागत कर उनका कल्याण करते हैं। भगवान् के नाम का आश्रय लेकर आचार्यचरण ने अनगिनत जीवों का उद्धार किया। इस सम्प्रदाय का विशिष्टाद्वैत सिद्धांत है जो श्रीसम्प्रदाय के नाम से भी जाना जाता है।   
शंकराचार्य जयन्ती महोत्सव 
शंकराचार्य जयन्ती महोत्सव 
शंकराचार्य जयन्ती महोत्सव 
 आज दिनांक 30 अप्रैल 2017 तदनुसार वैशाख कृष्ण पञ्चमी को आनन्द वृन्दावन आश्रम में आद्य शंकराचार्य का जन्म जयन्ती महोत्सव सोल्लास पूर्वक मनाया गया। स्वामी श्री गोविंदानन्द तीर्थ की अध्यक्षता में एक सत्सङ्ग संगोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें शांकर सम्प्रदायविद विद्वान् संतों ने सम्मिलित हो अपने-अपने भाव कुसुमांजली भाष्यकार के श्रीचरणों में अर्पित की। 
         आदि शंकराचार्य भगवान् ने श्रुति युक्ति और अनुभूति से वैदिक सनातन धर्म की रक्षा की तथा भारतवर्ष में चारों दिशाओं में चार शंकराचार्य मठों की स्थापना कर धर्म प्रचार-प्रसार का कार्य किया है। अनेकानेक स्तोत्रों एवं प्रकरण ग्रंथों की रचना की। और प्रस्थानत्रयी (गीता, उपनिषद, ब्रह्मसूत्र) पर भाष्य लिख कर अद्वैत सिद्धांत के लिए एक अपूर्व योगदान रहा, जो अक्षुण्ण रूप से अध्यात्म पथ के जिज्ञासुओं का मार्ग-दर्शन कर रहा  है।   
श्रीवल्लभाचार्य जयन्ती महोत्सव 
श्रीवल्लभाचार्य जयन्ती महोत्सव 
श्रीवल्लभाचार्य जयन्ती महोत्सव 
दिनांक 22 अप्रैल 2017 तदनुसार वैशाख कृष्ण एकादशी को आनन्द वृन्दावन आश्रम में महाप्रभु श्री वल्लभाचार्य जी महाराज की जन्म जयन्ती सोल्लास पूर्वक मनाई गई। जिसमें सम्प्रदाय के विद्वान् एवं संतों ने सम्मिलित हो श्रीआचार्य चरणों में अपने-अपने भाव सुमन अर्पित किये। सत्संग संगोष्ठी की अध्यक्षता वल्लभ वेदांताचार्य श्रीवसंत चतुर्वेदी जी ने की।     
 श्री चैतन्य महाप्रभु जयंती
 श्री चैतन्य महाप्रभु जयंती
आज दिनांक 12 /03/2017 तदनुसार फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा दिन रविवार को आश्रम में श्री चैतन्य महाप्रभु जयंती जगद्गुरु शंकराचार्य पुरीपीठाधीश्वर स्वामी श्रीनिश्चलानंद सरस्वती जी महाराज की अध्यक्षता में हर्षोल्लास पूर्वक मनाई गई।
महाशिवरात्रि
महाशिवरात्रि
महाशिवरात्रि
महाशिवरात्रि के पवन पर्व पर आश्रम में भवभावेश्वर महादेव जी का पूजन एवं रुद्राभिषेक हुआ।  और महाशिवरात्रि पर्व हर्षोल्लास से मनाया गया।
संन्यास जयंती महोत्सव
संन्यास जयंती महोत्सव
संन्यास जयंती महोत्सव
आज दिनांक 07-02-2017 तदनुसार माघ शुक्ल एकादशी दिन मंगलवार को महाराजश्री का संन्यास जयंती प्रातः पादुका पूजन से प्रारम्भ हुआ। 
प्रातः के सत्संग सत्र में वृन्दावन के अनेकानेक संत-विद्वानों ने सम्मिलित होकर अपने-अपने भाव महाराजश्री के चरणों में रखे। 

गीता जयन्ती महोत्सव 
गीता जयन्ती महोत्सव 
 आज दिनांक-10-12-2016 को आनन्द वृन्दावन आश्रम में गीता जयन्ती महोत्सव हर्षोल्लास से मनाया गया।  इसमें वृन्दावन के सन्त एवं विद्वानों ने समुपस्थित होकर अपने-अपने भाव रखे। 
29 वें आराधन महोत्सव का तृतीय  दिवस
सप्तदिवसीय 29 वें आराधन महोत्सव
29 वें आराधन महोत्सव का तृतीय  दिवस श्री नृत्यगोपाल  मन्दिर प्रांगण में पूज्य महाराजश्री के पूजन से प्रातः सत्संग संगोष्ठी का शुभारम्भ मधुर कार्ष्णि पीठाधीश्वर स्वामी श्री जगदानन्द जी की अध्यक्षता में हुआ। जिसमें अनेकानेक विद्वान्-सन्त एवं भक्त-गण सम्मिलित हुए।
              आश्रम के नित्यसत्संग वक्ता ब्रह्मचारी श्री रामचैतन्य जी ने श्रीचरणों में अपनी भाव-कुसुमाञ्जलि अर्पित करते हुए कहा कि आप लोग जहाँ हैं, जैसे हैं, जो कुछ हैं और जो कुछ कर रहे हैं उसे भगवान् के साथ जोड़ दें, भगवद्-समर्पित कर दें तो आपकी आराधना सम्पन्न हो जावेगी।
          महामंडलेश्वर स्वामीश्री प्रणवानन्द सरस्वतीजी महाराज ने बताया कि "आराधना" शब्द ही यह कहता है कि कोई आराध्य है और हम आराधक हैं। वस्तुतः पूज्य महाराजश्रो के प्रति हमारा सम्पूर्ण जीवन समर्पित होने से ही आराधना है।  चूँकि  आराध्य के प्रति समर्पण तद्रूपता ही है अर्थात् अपने आराध्य की गति,मति, एवं स्थिति के साथ एक रूपता का अनुभव हो तो हमारी आराधना सही दिशा में है। 
           विरक्त वैष्णव संत ने अपने उद्गार प्रकट किये कि पूज्य महाराजश्री ने जो सबको अभय प्रदान करने वाला साहित्य प्रदान किया है वह अविस्मरणीय रहेगा। आज भी अध्यात्म-जगत् उससे लाभान्वित हो रहा है, भविष्य में भी होता रहेगा एवं पूज्यश्री का ऋणी रहेगा। 
            जूनागढ़ के वयोवृद्ध संत श्रीअभिरामदास जी महाराज ने बताया कि पूज्यश्री ने अपनी अमृतवाणी द्वारा जिन तीनों धाराओं- कर्म,उपासना,ज्ञान - का अविरल प्रवाह किया है, उनका हमारे जीवन में समादर होना चाहिए- यह हमारी आराधना है। 
            वृन्दावन के  परम विद्वान् श्रीगिरिराज जी शास्त्री ने कहा कि हमें अपने जीवन का चरम-लक्ष्य-भगवद्प्राप्ति-प्राप्त हो उसीमें श्रीगुरुदेव के प्रति  हमारी आराधना की सार्थकता है।
             अध्यक्ष महोदय ने संगोष्ठी के समापन पर अपने भाव व्यक्त करते हुए कहा कि पूज्य महाराजश्री ने जो गीता, उपनिषद्, भागवत, सम्बन्धी रहस्यों को खोलते हुए दिव्य एवं सारग्राही, सरल साहित्य प्रदान किया है वह अद्वितीय है और उनके वचनों का आश्रय ग्रहण कर हम सब अपनी-अपनी साधना-आराधना में सरलता से अग्रसर हो सकते हैं, यह हम सब पर महाराजश्री की अपार करुणा एवं कृपा है। 
29 वें आराधन महोत्सव का द्वितीय दिवस 
सप्तदिवसीय 29 वें आराधन महोत्सव
29 वें आराधन महोत्सव का द्वितीय दिवस श्री नृत्यगोपाल  मन्दिर प्रांगण में पूज्य महाराजश्री के पूजन से प्रातः सत्संग संगोष्ठी का शुभारम्भ हुआ। इसमें भिन्न-भिन्न स्थानों से पधारे विभिन्न विद्वान्-सन्त एवं भक्त-गण सम्मिलित हुए। संगोष्टी की अध्यक्षता दण्डी स्वामी रामदेवानन्द जी सरस्वती ने की। नेपाल से पधारे हाईकोर्ट के निवृत्त जज श्री दामोदर जी अत्यंत भावविभोर होते हुए कहा कि हम सब का अहोभाग्य है कि हम पूज्यश्री की शरण में आये। अब हमारा यह कर्त्तव्य है कि हम उनके बताये साधन-मार्ग पर क्रमशः आगे बढ़ते रहें और अपने जीवन को सार्थक बनावें। 
          आश्रम के वरिष्ठ संत स्वामी श्री महेशानन्द जी सरस्वती ने कहा कि महाराजश्री ने जीवन भर किसी विशेष स्थान अथवा व्यक्ति के प्रति निष्ठा नहीं रखी। बल्कि, उनकी प्रीति भगवद्-प्रेमी तत्त्व जिज्ञासुओं के प्रति ही रही। जो कि अविस्मरणीय एवं अनुकरणीय भी है। 
          भागवत कथा व्यास आश्रम के संत स्वामी श्री श्रवणानंद सरस्वती जी ने कहा कि यह सप्त दिवसीय आराधन महोत्सव हमारे सम्पूर्ण जीवन आराधनामय बानवे - ऐसी पूज्य महाराजश्री के श्रीचरणों में प्राथना है। 
          अध्यक्ष महोदय ने सत्संग संगोष्ठी का समापन करते हुए अपनी अनुभूति को व्यक्त करते हुए कहा कि महाराजश्री के श्रीविग्रह के दर्शन आज भी  होते हैं और, हो सकते हैं, बशर्ते हमारे हृदय में  अटूट श्रद्धा होवे। 
सप्तदिवसीय 29 वें आराधन महोत्सव
सप्तदिवसीय 29 वें आराधन महोत्सव
सप्तदिवसीय 29 वें आराधन महोत्सव
सप्तदिवसीय 29 वें आराधन महोत्सव
परम पूज्य महाराजश्री के सप्तदिवसीय 29 वें आराधन महोत्सव का शुभारम्भ ज्योतिष्पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी श्री वासुदेवानन्द जी महाराज के करकमलों द्वारा दीप प्रज्वलित कर हुआ। उन्होंने अपनी भाव-सुमनाञ्जलि पूज्यचरणों में समर्पित करते हुए कहा कि पूज्य महाराजश्री को मैं अपना सद्गुरु ही मानता हूँ। मेरी उनके प्रति अगाध श्रद्धा है। पूज्य महाराजश्री की व्यक्तव्य की सरल सुबोध एवं सरस शैली की गद्गद् वाणी से स्तुति की। 
         इसी क्रम में पण्डित प्रवर श्री राजाराम जी मिश्र ने अपने भाव व्यक्त करते हुए कहा कि वृन्दावन की दिव्य भूमि में पूज्य महाराजश्री का पदार्पण हुआ और जीव-मात्र का कल्याण हुआ। महाराजश्री का पूरे विश्व के प्रति जो कारुण्य का भाव था उससे सब परिचित हैं। महाराश्री का शास्त्र ज्ञान तो अनुपम था, परन्तु उसको सरल शैली से सर्वसाधारण तक पहुँचाना उनका एक अविस्मरणीय कृत्य है। स्वामी गोविन्दानन्द तीर्थ जी ने आराध्य, आराधक और आराधना पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पहले आराधक को आराध्य तत्त्व का ज्ञान होना आवश्यक है तभी वह अपनी आराधना भली-भाँति कर सकता है। पूज्य महाराजश्री के स्वरुप को जानने के लिए उनका साहित्य ही एक ऐसा मार्ग है जिसके द्वारा हम महाराजश्री के साथ-साथ उनके द्वारा लखाए गए परम तत्त्व की प्राप्ति सहजता से कर सकते हैं। 
         सत्संग संगोष्ठी की अध्यक्षता कार्ष्णि पीठाधीश्वर स्वामी श्री गुरुशरणानंद जी ने की। उन्होंने भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि भले ही लोग कहते हैं कि महाराजश्री को लीला संवरण किये 29 साल हो चुके हैं परन्तु हम आज भी उनका अपरोक्ष करते हुए साक्षात् उनकी कृपा का अनुभव करते हैं।   
श्रीनिम्बार्काचार्य जयन्ती 
श्रीनिम्बार्काचार्य जयन्ती 
श्रीनिम्बार्काचार्य जयन्ती 
 आज दिनांक 14-11-2016- तदनुसार कार्तिक शुक्ल पूर्णिमा के दिन आनन्द वृन्दावन आश्रम में श्रीनिम्बार्काचार्य जयन्ती हर्षोल्लास पूर्वक मनाई गई। जिसमें इस सम्प्रदाय के विद्वान् संतों ने आचार्यश्री के चरणों में अपनी-अपनी भाव कुसुमाञ्जलि अर्पित की। 

           श्रीनिम्बार्काचार्य जी का सिद्धांत स्वाभाविक भेदाभेद के नाम से जाना जाता है। जो कि साधक के जीवन में द्वैत एवं अद्वैत दोनों का समन्वय करके इष्ट साक्षात्कार में परम उपयोगी है। वेद में वर्णन है "एकं सद् विप्रा वहुधा वदन्ति"एक परम सत्य परमात्मा है जिसको भिन्न-भिन्न प्रकार के लोगों के हित  लिए आचार्यों ने समय-समय पर भिन्न-भिन्न प्रकार से उस परमात्व-तत्त्व को प्रस्तुत किया। परम पूज्य महाराजश्री द्वारा प्रारम्भ की गयी विभिन्न आचार्यों की जयन्ती मनाने की परम्परा उनकी उदारता और विशालता का परिचय देती है। 
स्वाध्याय सत्र का समापन 
स्वाध्याय सत्र का समापन 
स्वाध्याय सत्र का समापन 
परम पूज्य महाराजश्री की कृपा से आनन्द वृन्दावन आश्रम में गत एक माह से चल रहे स्वाध्याय ज्ञान सत्र का कल दिनांक-14-09-2016 को निर्विघ्न समापन हुआ।  आगामी सत्र का  25 जनवरी 2017 से शुभारम्भ  होगा। 
श्री कृष्णा जन्माष्टमी महोत्सव 

श्री कृष्णा जन्माष्टमी महोत्सव 

श्री कृष्णा जन्माष्टमी महोत्सव 
कलिपावनावतार गोस्वामी श्री तुलसीदास जी महाराज का जन्म जयन्ती महोत्सवती 
जन्म जयन्ती महोत्सव
जन्म जयन्ती महोत्सव
जन्म जयन्ती महोत्सव
 आज दिनांक 10-08-2016 तदनुसार श्रावण शुक्ल सप्तमी को कलिपावनावतार गोस्वामी श्री तुलसीदास जी महाराज का जन्म जयन्ती महोत्सव आनन्द वृन्दावन आश्रम में बड़े धूम-धाम से मनाया गया, जिसमें वृन्दावन के विभिन्न विद्वान् संतों एवं भक्तों ने सम्मिलित हो अपने भाव-सुमन अर्पित किये।
  गोस्वामी तुलसीदास जी महाराज को भगवान् के नाम में अनुपम निष्ठा एवं विश्वास था।  वर्णन मिलता है कि इसी निष्ठा के फलस्वरुप काशी में उन्होंने एक ब्रह्म हत्यारे के हाथ से भगवान् शंकर के मुख्य गण नन्दीश्वर को प्रसाद दिलवाया, जिसे नन्दीश्वर ने सहर्ष स्वीकार किया क्योंकि उसने राम नाम लेकर वह प्रसाद उन्हें निवेदित किया था। इससे हमें गोस्वामी तुलसीदास के जीवन से एक बहुत बड़ा निर्देश प्राप्त होता है कि भगवन्नाम में अपार शक्ति है जो धर्म,अर्थ,काम,मोक्ष प्रदान करती है।  अतः हमारे जीवन में भी भगवन्नाम के प्रति अटूट विश्वास एवं निष्ठाहोनी चाहिए।
आनन्द जयन्ती 
आनन्द जयन्ती 
आनन्द जयन्ती 
  आज दिनांक 02-08-2016 तदनुसार श्रावण कृष्ण अमावस्या को परम पूज्य महाराजश्री की आनन्द जयन्ती (जन्म जयन्ती  महोत्सव ) बड़े धूम-धाम से आनन्द वृन्दावन  आश्रम में मनाया गया। इस समारोह के उपलक्ष्य में एक सत्संग सभा का आयोजन किया गया जिसमें आश्रम के एवं वृन्दावन के विद्वान् संतों ने अपने-अपने भाव सुमन महाराजश्री के श्रीचरणों में समर्पित किये। 
       महापुरुष संसार में जीवों के कल्याण के लिए अवतरित होते हैं। पूज्य महाराजश्री भारतवर्ष की महान विभूतियों में एक रहे हैं। उनके जीवन में जो सदाचार, हृदय में भगवद्-भक्ति एवं मष्तिष्क में साक्षात् ब्रह्मज्ञान था वह हमारे जीवन में भी आवे - पूज्य श्रीचरणों में ऐसी प्रार्थना है।  
श्रीगुरुपूर्णिमा पर्व
श्रीगुरुपूर्णिमा पर्व
श्रीगुरुपूर्णिमा पर्व
  आज दिनांक 19-07-2016 तद्नुसार आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा दिन मंगलवार को आश्रम में गुरुपूर्णिमा महोत्सव हर्षोल्लास से मनाया गया। जिसके अंतर्गत एक विद्वत्त् संगोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसकी अध्यक्षता स्वामी श्रीगोविंदानन्द सरस्वती जी महाराज ने की। उन्होंने कहा कि गुरुदेव भगवान् जिसपर कृपा करते हैं उस साधक के सारे विघ्न दूर हो जाते हैं। गुरुदेव के वाक्यों में श्रद्धा, तत्परता और इन्द्रिय संयम होना आवश्यक है। यही ज्ञान प्राप्ति का सोपान है। दृश्य से दोषदृष्टि हुए बिना वैराग्य होना कठिन है। भगवान् ही सद्गुरू के रूप में आकर के शिष्यों का कल्याण करते हैं। गुरु जो कहते हैं उनके अनुसार चलने से अभिमान्य वृत्त होता है। मनमुखी साधन करने से जीवन में अभिमान बढ़ता है। जो पतन का कारण होता है। मन,क्रम,वचन से गुरुदेव का हो जाना यही शिष्य की गुरु भक्ति है। इस अवसर पर 2 ग्रंथों - मन्त्र विज्ञान , आनन्दवृत्तम् - का लोकार्पण किया गया।      
श्रीगुरुपूर्णिमा पर्व
आनन्द जयन्ती 
जगद्गुरु श्री रामानुजाचार्य जयन्ती
जगद्गुरु श्री रामानुजाचार्य जयन्ती
जगद्गुरु श्री रामानुजाचार्य जयन्ती

आज दिनांक 11-05-2016 तदनुसार वैशाख शुक्ल पंचमी को आनन्द वृंदावन आश्रम में श्रीशंकराचार्य जयन्ती बड़े धूम-धाम से मनाई गई। इस शुभावसर पर एक सत्संग संगोष्ठी का समायोजन किया गया जिसमें शांकर सम्प्रदाय के अनेक विद्वान संतों एवं जिज्ञासुओं ने सम्मिलित हो सत्संग का लाभ उठाया। संगोष्ठी की अध्यक्षता स्वामी श्रीगोविंदानन्द तीर्थ ने की। सभी ने ये विचार प्रकट किया कि शंकरावतार भगवान् श्रीशंकराचार्य ने अपने वेदान्त सिद्धांत के प्रतिपादन  में वेद को आधार बनाया और वेदों में एक परमात्म तत्त्व का निरूपण है उस वेदार्थ के सम्यक् दर्शन हेतु भाष्यकार श्रीशंकराचार्य के वेदान्त दर्शन का संसार सागर से छूटने के लिए मुमुक्षु जिज्ञासुओं का पथ प्रदर्शक के रूप में सर्वाधिक योगदान रहा है और आगे भी रहेगा। 

श्रीशंकराचार्य जयन्ती
श्रीशंकराचार्य जयन्ती

आज दिनांक 11-05-2016 तदनुसार वैशाख शुक्ल पंचमी को आनन्द वृंदावन आश्रम में श्रीशंकराचार्य जयन्ती बड़े धूम-धाम से मनाई गई। इस शुभावसर पर एक सत्संग संगोष्ठी का समायोजन किया गया जिसमें शांकर सम्प्रदाय के अनेक विद्वान संतों एवं जिज्ञासुओं ने सम्मिलित हो सत्संग का लाभ उठाया। संगोष्ठी की अध्यक्षता स्वामी श्रीगोविंदानन्द तीर्थ ने की। सभी ने ये विचार प्रकट किया कि शंकरावतार भगवान् श्रीशंकराचार्य ने अपने वेदान्त सिद्धांत के प्रतिपादन  में वेद को आधार बनाया और वेदों में एक परमात्म तत्त्व का निरूपण है उस वेदार्थ के सम्यक् दर्शन हेतु भाष्यकार श्रीशंकराचार्य के वेदान्त दर्शन का संसार सागर से छूटने के लिए मुमुक्षु जिज्ञासुओं का पथ प्रदर्शक के रूप में सर्वाधिक योगदान रहा है और आगे भी रहेगा। 

श्रीनृत्यगोपालजी
श्रीनृत्यगोपालजी
श्रीनृत्यगोपालजी
श्रीनृत्यगोपालजी
आज दिनांक 9-5-2016 तदनुसार वैशाख शुक्ल तृतीया के दिन परम पूज्य महाराजश्री के परम आराध्य ठाकुर श्रीनृत्यगोपालजी का पाटोत्सव बड़े हर्षोल्लास एवं धूम-धाम से मनाया गया। आप सबको आनन्द कन्द ठाकुर श्रीनृत्यगोपाल जी के पाटोत्सव की बहुत - बहुत बधाई। 
श्रीवल्ल्भाचार्य जयन्ती
श्रीवल्ल्भाचार्य जयन्ती
श्रीवल्ल्भाचार्य जयन्ती
आज दिनांक 03-05-2016 को आश्रम में श्रीवल्ल्भाचार्य जयन्ती मनाई गयी। इसमें अनेकानेक संत-विद्वानों ने भाग लिया। संगोष्ठी का शुभारम्भ बधाई गान के साथ हुआ। संगोष्ठी की अध्यक्षता श्री वल्ल्भ सम्प्रदाय के परम विद्वान्  श्री विष्णु  जी चौबे ने की। उन्होंने आचार्य चरणों के प्रति अपनी भाव पुष्पांजलि समर्पित करते हुए कहा कि आचार्य श्री वल्ल्भाचार्य  जी ने प्रभु पथ पर चलने वालों के लिए पुष्टिमार्ग प्रदान कर एक बहुत बड़ा उपकार किया है।  इसके अनुसार प्रभु प्रीति एवं प्राप्ति में जीव का अपना कोई बल नहीं है। भगवत् पुष्टि अर्थात् कृपा ही साधन है जिसके द्वारा आश्रय तत्त्व पुरुषोत्तम श्रीकृष्ण की प्राप्ति एवं उनकी सेवा प्राप्ति सम्भव है।  
महाशिवरात्रि पर्व 
महाशिवरात्रि पर्व 
महाशिवरात्रि पर्व 
महाशिवरात्रि पर्व 
महाशिवरात्रि पर्व 
महाशिवरात्रि पर्व के अवसर पर रुद्राभिषेक एवं पूजन हुआ। 
संन्यास जयन्ती
संन्यास जयन्ती
श्री रामानंदाचार्य जयंती 
श्री रामानंदाचार्य जयंती 
आज दिनांक 31-01-2016 को आश्रम में श्री रामानंदाचार्य जयंती मनायी गयी। प्रातः पूजन एवं सत्संग सभा का आयोजन किया गया। जिसमें अनेक संत-विद्वान् सम्मिलित होकर अपने-अपने उद्गार एवं भाव प्रकट किये।  
 गीता जयन्ती महोत्सव
 गीता जयन्ती महोत्सव
आराधन महोत्सव
आराधन महोत्सव
आराधन महोत्सव
आराधन महोत्सव
आराधन महोत्सव
आराधन महोत्सव
आराधन महोत्सव
आराधन महोत्सव
आराधन महोत्सव
आराधन महोत्सव
आराधन महोत्सव
 आज दिनांक -9 -12-2015 को  २८ वें  परम पूज्य महाराजश्री के आराधन महोत्सव पर आज की सभा में अनेक विद्वान् संतों ने सम्मिलित होकर अपने-अपने भाव सुमन अर्पित किये। सत्संग सत्र  की अध्यक्षता पूज्य श्रीरामेशभाईजी ओझा ने की।परम पूज्य महाराजश्री द्वारा संचालित सामाजिक एवं सांस्कृतिक परम्पराओं के अंतर्गत विद्वानों के सम्मान कार्यक्रम के क्रम में  इस सत्र में विशेषरूप से ठाकुर श्रीराधारमण जी के सेवायत ब्रजनिष्ठ वयोवृद्ध श्रीपुरुषोत्तम गोस्वामीजी को आश्रम ट्रस्ट आनन्द प्रस्तुति ऑडियो विज़ुअल सेंटर द्वारा अभिनंदन पत्र  प्रदान किया गया।   
 आज दिनांक -8 -12-2015 को   २८ वें  आराधन महोत्सव के  सप्तम  दिवस के प्रातः सत्संग सत्र  में अनेक विद्वान् संतों ने सम्मिलित होकर अपने-अपने भाव सुमन अर्पित किये। सत्संग सत्र  की अध्यक्षता पंडित प्रवर राजारामजी मिश्र ने  की। उन्होंने कहा कि संत के अतिरिक्त संसार में डूबे हुए जीवों का उद्धार कोई नहीं कर सकता है। संत जीव मात्र के सच्चे हितैषी एवं रक्षक हैं। धराधाम पर संत के स्वरुप में परमात्मा ही अवतरित होते हैं। हमारा जीवन साधना के मार्ग में ईमानदारी और सच्चाई से चलना चाहिए। जीवन को उन्नत बनाने के लिए यथार्थ बोध का होना आवश्यक है। आज वैदिक दर्शन के स्वाध्याय और चिंतन का लोप होता जा रहा है। उसी के कारण आज अशांति है। सत्संग, सद्विचार जीवन में परिवर्तन की कुँजी है।  
 आज दिनांक -7 -12-2015 को   २८ वें  आराधन महोत्सव के   षष्टम  दिवस के प्रातः सत्संग सत्र  में अनेक विद्वान् संतों ने सम्मिलित होकर अपने-अपने भाव सुमन अर्पित किये। परम पूज्य महाराजश्री के आराधन महोत्सव पर आज की सभा में अनेक विद्वान् संतों ने सम्मिलित होकर अपने-अपने भाव सुमन अर्पित किये। सत्संग सत्र  की अध्यक्षता पूज्य महाराजश्री के परमप्रिय शिष्य गौड़पाद पीठाधीश्वर स्वामी श्री प्रज्ञानानंद सरस्वती ने की। इस  अवसर पर विकलांग एवं वधिर लोगों  लिए एक विशेष कार्यक्रम  आयोजन हुआ। जिसमें सुरेन्द्र भाई शाह एवं चिराग भाई शाह  "नारायण पावर टेक प्राइवेट लिमिटेड " के सौजन्य से आनन्द प्रस्तुति अॉडिओ विज़ुअल सेन्टर द्वारा  10 वैशाखी विकलांगों  लिए एवं  वधिरों  लिए 10 कर्ण उपकरण वितरित किये गए। 
  आज दिनांक -6 -12-2015 को   २८ वें  आराधन महोत्सव के   पंचम दिवस के प्रातः सत्संग सत्र  में अनेक विद्वान् संतों ने सम्मिलित होकर अपने-अपने भाव सुमन अर्पित किये। सत्संग सत्र  की अध्यक्षता जगद्गुरु रामानुजाचार्य श्रीअनिरुद्धाचार्य जे ने की। अपने श्रद्धा सुमन पूज्य महाराजश्री के श्रीचरणों में समर्पित करते हुए उन्होंने कहा कि महापुरुष लोग भगवान् के स्वरुप होते हैं। नारायण ही गुरुदेव के रूप में आकर शिष्य भक्तों का कल्याण करते हैं। प्रकृति मण्डल में ईश्वर और महापुरुषों को सहज रूप में नहीं पहचाना जा सकता। केवल उनकी कृपा ही उनकी पहचान करा सकती है। पूज्य महाराजश्री का जीवन आलौकिक था। उनकी कीर्ति, यश सदा- सर्वदा बना रहेगा। श्रीचरणों में कोटिशः प्रणाम ! 
  आज दिनांक -5 -12-2015 को   २८ वें  आराधन महोत्सव के द्वितीय  दिवस के प्रातः सत्संग सत्र  में अनेक विद्वान् संतों ने सम्मिलित होकर अपने-अपने भाव सुमन अर्पित किये। सत्संग सत्र  की अध्यक्षता दण्डी स्वामी श्रीरामदेवानन्द सरस्वती ने की। अध्यक्ष स्वामीजी ने अपने उद्गार प्रकट किये कि महापुरुषों को समझना मुश्किल है। हाँ, श्रद्धा और सत्संग से महापुरुषों को समझा जा सकता है। पूज्य महाराजश्री शास्त्रज्ञ एवं अनुभवी महापुरुष थे। उन्होंने ज्ञान, वैराग्य और भक्ति की वह सरिता प्रवाहित की जो आज भी उनके ग्रंथों एवं वाणी के सीडी, डीवीडी द्वारा अनवरत प्रवाहित  हो रही है। श्रीगुरु चरणों में पूर्ण समर्पण हो तभी समर्पित सेवक के जीवन में ज्ञान, वैराग्य, भक्ति प्राप्त होगी। पूज्य महाराजश्री के श्रीचरणों में प्रणति !
आज दिनांक 2-12-2015 को   २८ वें  आराधन महोत्सव के प्रथम दिवस के प्रातः सत्संग सत्र के अध्यक्ष महामंडलेश्वर स्वामी श्रीअवशेषानन्द जी महाराज के द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर सत्संग सत्र का शुभारम्भ हुआ। इसमें अनेक संत-विद्वानों ने अपने-अपने उद्गार व्यक्त किये। सत्संग सभा के अध्यक्ष स्वामी श्रीअवशेषानन्द जी महाराज ने कहा कि बचपन से वृन्दावन आने का सौभाग्य मिला परन्तु पूज्य महाराजश्री के दर्शन कर यात्रा सफल होती थी। उन्होंने कहा कि अध्यात्म विद्या सबसे बड़ी विद्या होती है। जहाँ अध्यात्म विद्या की चर्चा होती है जहाँ सत्संग व साधना हो वही आश्रम होता है। संतों का दर्शन पुण्य प्रदान करने वाला होता है। सत्संग और आशीर्वचन से भगवत्-प्राप्ति सुलभ हो जाती है। महाराजश्री का जीवन अध्यात्म-विद्यामय रहा। व्यवहार और परमार्थ दोनों में वे पूर्ण कुशल थे। महाराजश्री के ग्रंथों और सीडी, डीवीडी के माध्यम से हम महाराजश्री को समझ सकते हैं। आराध्य, आराधक और आराधना जहाँ एक हो जायँ यही सच्ची आराधना है। 

इस अवसर पर पूज्य महाराजश्री की वाणी के संकलित नवीन ग्रन्थ "ब्रह्मस्तुति" का लोकार्पण हुआ। 
आज दिनांक -3-12-2015 को   २८ वें  आराधन महोत्सव के द्वितीय  दिवस के प्रातः सत्संग सत्र में अनेक संत-विद्वानों ने अपने-अपने उद्गार व्यक्त किये। सत्संग सभा के अध्यक्ष मधुर कार्ष्णि पीठाधीश्वर स्वामीश्री जगदानन्दजी  महाराज ने कहा कि पूज्य महराजश्रीने ज्ञान,भक्ति और कर्म की साधना अधिकारी भेद से भक्तों को बतलाई।  उन्होंने कहा कि महाराजश्री जैसे सन्तों का मिलना भगवान् की कृपा से ही होता है।  जब ऐसे श्रोत्रिय ब्रह्मनिष्ठ सद्गुरुदेव के श्रीचरणों में शिष्य समर्पित होता है  , सेवा से अंतःकरण जब पवित्र होता है तो वे लौकिक धर्म से इतर परम धर्म का उपदेश करते हैं तो अविद्या निवृत्ति हो कर परमानन्द की प्राप्ति होती है 
  परम पूज्य महाराजश्री के आराधन महोत्सव पर आज की सभा में अनेक विद्वान् संतों ने सम्मिलित होकर अपने-अपने भाव सुमन अर्पित किये। सत्संग सत्र  की अध्यक्षता स्वामी श्रीगोविंदानंदजी तीर्थ ने की। उन्होंने कहा सच्चिदानंद परमात्मा का अनुभव जिसने किया हो वह संत है। वह हमें असत्य से निकाल कर सत्य में प्रतिष्ठित  करते हैं। वे भगवान् के तात्त्विक स्वरुप को जानते हैं और वही दृष्टि अपने परिकर को भी प्रदान करते हैं। पूज्य महाराजश्री ऐसे ही संत थे, जो आज भी अपने वाणी के द्वारा हमारे अज्ञान को निवृत्त कर सब द्वंदों से छुटकारा दिला रहे हैं। श्रीचरणों में प्रणाम    
 
कार्तिक पूर्णिमा 
कार्तिक पूर्णिमा 
कार्तिक पूर्णिमा 
 
आज दिनांक 25-11-2015 कार्तिक पूर्णिमा को आनन्द वृन्दावन आश्रम में श्रीनिम्बार्काचार्य जयन्ती सोल्लास पूर्वक मनाई गई। इससे सम्बंधित प्रातः एक सत्संग सभा का आयोजन किया गया जिसमें इस सम्प्रदाय के अनेकानेक विद्वान् संतों ने भाग लिया एवं अपनी भाव पुष्पांजलि समर्पित की। सभा के अध्यक्ष आचार्य विद्वान् श्रीपुरुषोत्तम शरण जी ने अपने भाव व्यक्त करते हुए कहा कि श्रीनिम्बार्काचार्य भगवान् द्वैताद्वैत सिद्धांत के प्रवर्तक हैं उन्होंने सामान्य जीवों से  भगवान् की युगलोपासना कराकर उनके कल्याण का मार्ग प्रशस्त किया। आपने बताया उपास्य और उपासक के बीच में माया है और जिससे उपास्य की शरणागति ही छुड़ा सकती है। भगवान् रस स्वरुप हैं अच्युत् भगवान् जिसको अपना लेते हैं उसको छोड़ते नहीं। उनके गुणानुवाद के श्रवण, सत्संग से ज्ञान-विज्ञान की प्राप्ति होती है।    
आराधना  महोत्सव 
आराधना  महोत्सव 
आराधना  महोत्सव 
आराधना  महोत्सव 
आराधना  महोत्सव 

श्रीगुरुपूर्णिमा पर्व
जन्माष्टमी एवं नन्द महोत्सव
नन्द महोत्सव
नन्द महोत्सव
नन्द महोत्सव
नन्द महोत्सव
नन्द महोत्सव
आज दिनांक-31-07-2015 दिन-शुक्रवार को आश्रम में श्रीगुरुपूर्णिमा पर्व  सोल्लास पूर्वक मनाया गया।  प्रातः 6 बजे अध्यात्म विद्या केन्द्र में भक्त शिष्यों द्वारा विधिवत पादुका पूजन हुआ।  तदोपरान्त स्वामी श्री श्रवणानन्द सरस्वती जी महाराज की अध्यक्ष्ता में सत्संग सभा का आयोजन हुआ।  जिसमें  कई सन्त महानुभावों ने गुरु महिमा पर विचार व्यक्त किये।  महाराजश्री के दो ग्रन्थ-"सुदामा चरित" एवं "आदित्य हृदय स्तोत्र " का लोकार्पण हुआ।  साथ ही महाराज श्री की वाणी "सत्संग पत्रक" नामक पुस्तक प्रसाद रूप में वितरित किया गया। 
श्रीगुरुपूर्णिमा पर्व
श्रीगुरुपूर्णिमा पर्व
श्रीगुरुपूर्णिमा पर्व
श्रीगुरुपूर्णिमा पर्व
श्रीगुरुपूर्णिमा पर्व
विशेष स्वाध्याय सत्र-"मधुसूदनी गीता"
मधुसूदनी गीता
मधुसूदनी गीता
श्री पुरुषोत्तम मास में आयोजित विशेष स्वाध्याय सत्र-"मधुसूदनी गीता"  का  दिनांक-17-07-2015 को विश्राम हुआ।  अगला सत्र दिसम्बर-15-12-2015 से प्रारम्भ होगा।  उसमें मधुसूदनी गीता अध्याय-18 एवं तैत्तिरीयोपनिषद् -भाष्य वार्तिक पर स्वाध्याय होगा। 
श्रीरामानुजाचार्य  जयन्ती महोत्सव

श्रीरामानुजाचार्य  जयन्ती महोत्सव

श्रीरामानुजाचार्य  जयन्ती महोत्सव

श्रीरामानुजाचार्य  जयन्ती महोत्सव
आज दिनांक-24 अप्रैल  2015 , वैशाख शुक्ल षष्ठी  के दिन श्रीरामानुजाचार्य  जयन्ती महोत्सव आनन्द वृन्दावन आश्रम में सोल्लास पूर्वक मनाया गया। इसके उपलक्ष्य में सत्संग संगोष्ठी का आयोजन किया गया। 
 श्रीआद्यशंकराचार्य  जयन्ती महोत्सव 

 श्रीआद्यशंकराचार्य  जयन्ती महोत्सव 

 श्रीआद्यशंकराचार्य  जयन्ती महोत्सव 

 श्रीआद्यशंकराचार्य  जयन्ती महोत्सव 
आज दिनांक-23 अप्रैल  2015 , वैशाख शुक्ल पंचमी   के दिन श्रीआद्यशंकराचार्य  जयन्ती महोत्सव आनन्द वृन्दावन आश्रम में सोल्लास पूर्वक मनाया गया।  इसके उपलक्ष्य में सत्संग संगोष्ठी का आयोजन किया गया। 
श्रीवल्ल्भाचार्य जयन्ती महोत्सव

श्रीवल्ल्भाचार्य जयन्ती महोत्सव

श्रीवल्ल्भाचार्य जयन्ती महोत्सव

श्रीवल्ल्भाचार्य जयन्ती महोत्सव
आज दिनांक-15 अप्रैल  2015 , वैशाख कृष्ण एकादशी  के दिन श्रीवल्ल्भाचार्य जयन्ती महोत्सव आनन्द वृन्दावन आश्रम में सोल्लास पूर्वक मनाया गया।  इसके उपलक्ष्य में सत्संग संगोष्ठी का आयोजन किया गया। 
श्रीराम रक्षा स्तोत्र एवं श्री दुर्गा सप्तशती यज्ञ 

श्रीराम रक्षा स्तोत्र एवं श्री दुर्गा सप्तशती यज्ञ

श्रीराम रक्षा स्तोत्र एवं श्री दुर्गा सप्तशती यज्ञ
(आनंद वृन्दावन आश्रम में चैत्र नवरात्र पर श्रीराम रक्षा स्तोत्र एवं श्री दुर्गा सप्तशती यज्ञ का विशेष आयोजन किया गया है। )
 श्री चैतन्य महाप्रभु जयन्ती महोत्सव 

 श्री चैतन्य महाप्रभु जयन्ती

 श्री चैतन्य महाप्रभु जयन्ती

 श्री चैतन्य महाप्रभु जयन्ती
आज दिनांक-5 मार्च 2015 , फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा के दिन श्री चैतन्य महाप्रभु जयन्ती महोत्सव आनन्द वृन्दावन आश्रम में मनाया गया।  इसके उपलक्ष्य में सत्संग संगोष्ठी का आयोजन किया गया जिसकी अध्यक्षता पुरी पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी श्री निश्चलानन्द सरस्वती जी महाराज ने की। 
अध्यक्ष महोदय ने अपने उद्बोधन में कहा कि श्रीचैतन्य महाप्रभु श्रीराधाकृष्ण युगल के प्रेमावतार थे उन्होंने नाम संकीर्तन के द्वारा जनसामान्य में भगवद् भक्ति एवं प्रेम का प्रसार किया। 
महाशिवरात्रि

महाशिवरात्रि

महाशिवरात्रि

महाशिवरात्रि
आनन्द वृन्दावन आश्रम में श्री भावभावेश्वर महादेव जी के मन्दिर में महाशिवरात्रि पर्व बड़े धूम-धाम से मनाया गया।  चारों पहर के अभिषेक में बटुक समुदाय के सस्वर वेद पाठ से पूरा मन्दिर प्रांगण गुंजायमान हो उठा।  अनेकों सन्त, भक्तजन रात्रि जागरण में सम्मिलित रहे।
 
संन्यास जयन्ती
संन्यास जयन्ती
संन्यास जयन्ती महोत्सव
संन्यास जयन्ती महोत्सव
संन्यास जयन्ती महोत्सव
 
आनंद वृन्दावन आश्रम में  आज 30-जनवरी-2015  तदनुसार माघ शुक्ल एकादशी को परम पूज्य महाराजश्री का 73 वां संन्यास जयन्ती महोत्सव बड़े धूम-धाम से मनाया गया। 
प्रातः 7 बजे उपस्थित भक्त संत शिष्य परिकर ने सम्मिलित रूप से अध्यात्म विद्या केन्द्र में विधिवत् पादुका पूजन किया। तदनन्तर भावभावेश्वर मन्दिर के प्रांगण में सत्संग संगोष्ठी में विद्वान्  संतों ने उपस्थित हो संन्यास से सम्बंधित अपने-अपने विचार व्यक्त किये - 
लोकैषणा, पुत्रैषणा एवं वित्तैषणा का त्याग संन्यास है। 
प्राणिमात्र को निर्भयता प्रदान करना संन्यास का मूल मन्त्र है। 
प्रदीप्त प्रज्वलित अंतर्दृष्टि माने आत्मदृष्टि - ब्रह्मदृष्टि - भगवद्-दृष्टि का नाम ही संन्यास है। 
संन्यासी जीवन माने देश-काल-वस्तु से अनासक्ति। 
संन्यास लिया नहीं जाता हो जाता है। 
महाराजश्री का संन्यास जयन्ती मनाने का तात्पर्य है कि महाराजश्री के जीवन में जो संन्यास का तात्पर्य ज्ञान और वैराग्य है, वह हमारे भी जीवन में उतरे- ऐसी श्री चरणों में प्रार्थना है।
 
रामानन्दाचार्य जयन्ती
जगद्गुरु श्री रामानंदाचार्य जी का जन्म जयंती महोत्सव 
जगद्गुरु श्री रामानंदाचार्य जी का जन्म जयंती महोत्सव 
 
आज दिनांक 12 . 01 . 2015 तदनुसार माघ कृष्ण सप्तमी को आनंद वृन्दावन आश्रम में जगद्गुरु श्री रामानंदाचार्य जी का जन्म जयंती महोत्सव सोल्लास पूर्वक मनाया गया। सभा के अध्यक्ष संप्रदाय के विद्वान् संत श्री बिहारीदास जी भक्तमाली ने कहा कि भगवान् श्री राम ही संत रामानंदाचार्य के रूप में अवतरित हो कर के जन जन में भगवन्नाम जप का उपदेश किये। अध्यक्ष जी ने कहा कि पापियों के हृदय रुपी चट्टान में कमल खिलने का कार्य दुष्कर है, परन्तु श्री आचार्य चरण ने नाम की महिमा से हृदय रुपी पाषाण में भी भक्ति रुपी कमल खिला दिया। वस्तुतः संत पापियों के हृदय को बदल कर भक्त बनाते हैं।  
 
 
 
 
 
 
 
 
 

 

Copyright 'Maharaj shri' 2013-14

 

Website Design & Developed by : Total Web Technology Pvt. Ltd.